शिलाई। किशाऊ बांध परियोजना के विरोध में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के प्रभावित ग्रामीणों ने रविवार को सीमांत क्षेत्र मेलोथ में जोरदार प्रदर्शन किया। किशाऊ बांध संघर्ष समिति के बैनर तले आयोजित इस प्रदर्शन में दोनों राज्यों के करीब 25 गांवों से सैकड़ों महिला-पुरुषों ने भाग लिया। ग्रामीणों ने मेलोथ से कोटा-कुंवानू तक विरोध रैली निकालते हुए मिनस-देहरादून राज्य मार्ग पर करीब छह घंटे तक चक्का जाम किया। इस दौरान केंद्र और प्रदेश सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की गई। रविवार सुबह करीब नौ बजे शुरू हुए चक्का जाम के कारण मिनस-देहरादून मार्ग पर यातायात पूरी तरह ठप हो गया। सडक़ के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई, वहीं मेलोथ बाजार भी पूरी तरह बंद रहा।
मेलोथ सहित आसपास के क्षेत्रों में पुलिस और पीएससी के जवानों की तैनाती की गई थी। किशाऊ बांध संघर्ष समिति के अध्यक्ष श्याम सिंह तोमर ने कहा कि कुंवानू की जमीन और लोगों के अधिकारों की रक्षा के लिए वह अपनी जान की बाजी लगाकर भी संघर्ष करेंगे। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने भी एकजुट होकर कहा कि ग्रामीण अपनी पुश्तैनी जमीन और क्षेत्र की रक्षा के लिए अंतिम सांस तक संघर्ष करेंगे। महासू देवता के वजीर मातवर सिंह तोमर ने भी परियोजना का कड़ा विरोध किया है।
मांग पर अड़े रहे ग्रामीण
संघर्ष समिति के महासचिव दलीप सिंह तोमर ने आरोप लगाया कि प्रभावित लोगों की सहमति और राय लिए बिना उनकी जमीन से संबंधित एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए हैं। प्रदर्शन के दौरान उत्तराखंड जल विद्युत निगम लिमिटेड के महाप्रबंधक इंद्र मोहन कार्शी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने प्रदर्शनकारियों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपनी मांगों पर अड़े रहे।
पुश्तैनी जमीन नहीं छोड़ेंगे
ग्रामीणों का कहना है कि परियोजना से उनकी पुश्तैनी जमीन, गांव, देवी-देवताओं के मंदिर, धार्मिक आस्था, संस्कृति और सामाजिक विरासत प्रभावित होगी। प्रदर्शन में मेलोथ के प्रधान राहुल तोमर, सोहन सिंह चौहान, प्रताप सिंह चौहान, अजब सिंह तोमर, मदान सिंह तोमर, नरेंद्र तोमर, खजान तोमर, चंदन सिंह तोमर, आत्मा राम भारद्वाज सहित दोनों राज्यों के सैकड़ों ग्रामीण महिला-पुरुष उपस्थित रहे।
