शिमला। हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने पूर्व सीपीएस नीरज भारती, बलदेव कुमार उर्फ बंटी सिराजी और पूर्व उप महाधिवक्ता विनय शर्मा के सोशल मीडिया अकाउंट बंद करने के मामले में प्रदेश सरकार को कड़ी चेतावनी दी है। अदालत ने कहा कि सरकार बिना ठोस तथ्यों के किसी भी फेसबुक अकाउंट को मनमाने ढंग से बंद नहीं कर सकती। पीठ ने निर्धारित समय के भीतर संबंधित अकाउंट बहाल करने का आदेश देते हुए ऐसा न होने पर मुआवजा लगाने की चेतावनी भी दी है। न्यायाधीश विवेक सिंह ठाकुर और न्यायाधीश भूपेश शर्मा की खंडपीठ के समक्ष दो अलग-अलग रिट याचिकाओं पर सुनवाई हुई।
याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि सरकार के खिलाफ बोलने वालों के सोशल मीडिया अकाउंट बंद किए जा रहे हैं। सरकार के कहने पर मेटा ने उनके फेसबुक अकाउंट बंद किए हैं। उन्होंने इसे तानाशाही रवैया बताते हुए अकाउंट बहाल करने की मांग की। सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार की ओर से कोई पेश नहीं हुआ। इस पर अदालत ने उसके खिलाफ एकतरफा कार्यवाही के आदेश दिए। प्रदेश सरकार और अन्य प्रतिवादियों की ओर से संयुक्त जवाब दाखिल किया गया है, जबकि कुछ अन्य प्रतिवादियों को जवाब देने के लिए तीन सप्ताह का अतिरिक्त समय दिया गया है।
एक अन्य मामले में रजिस्ट्री की रिपोर्ट में बताया कि मेटा कंपनी को भेजा गया नोटिस दिए गए पते पर कंपनी नहीं मिलने के कारण तामील नहीं हो सका। इस पर पीठ ने याचिकाकर्ता को दो दिन के भीतर कंपनी का सही पता दाखिल करने के निर्देश दिए। इसके बाद मेटा को दोबारा नोटिस जारी किया जाएगा। अब इन दोनों मामलों की अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी।
टेक डाउन नोटिस का रिकॉर्ड मांगा
पिछली सुनवाई में हाईकोर्ट ने सरकार से मेटा को भेजे गए टेक डाउन नोटिस से संबंधित दस्तावेज और जानकारी मांगी थी। अदालत ने पूछा था कि क्या कार्रवाई में आईटी नियम, 2021 के नियम 3(1)(डी) का पालन किया गया। साथ ही नोटिस जारी करने वाले अधिकारी को अधिकृत करने वाले लिखित आदेश, उसका नाम, पद और रैंक तथा कंटेंट हटाने के लिए इस्तेमाल की गई कानूनी धारा का ब्योरा मांगा था। अदालत ने हटाए गए कंटेंट के सटीक यूआरएल और लिंक भी पेश करने को कहा था।
