शिमला : सालभर में 24 एकादशी तिथि होती है। इनमें से सभी एकादशी को अलग-अलग नामों से जाना जाता है। एकादशी व्रत भगवान विष्णु को समर्पित है। ज्येष्ठ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी तिथि को निर्जला एकादशी व्रत रखा जाता है।इसी कड़ी में बुधवार को राजधानी शिमला में निर्जला एकादशी का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया गया। शिमला में विभिन्न संस्थाओं द्वारा जगह जगह फल और मीठे पानी की छबीले लगाई गई और लोगो ने मीठे पानी का स्वाद लिया।इस पर्व पर लोगो द्वारा रिज पर,रोटरी टॉवन हॉल के ऊपर,गेयटी के पास,लौवर बाजार,संजौली, छोटा शिमला और टूटू में मीठा पानी और फल बांटे गए।इस बारे में जब हमने पंडित प्रेम शर्मा से बात की तो उन्होंने बताया कि निर्जला एकादशी के दिन व्रती को बिना जल ग्रहण किए व्रत करना होता है। मान्यता है कि इस निर्जला एकादशी व्रत का फल साधक को अनंत गुना फल व्रत रखने वाले को प्राप्त होता है यदि वह इस व्रत का पालन सच्ची लगन और श्रद्धा के साथ करता है। भगवान विष्णु को समर्पित इस एकादशी-व्रत में हमें दो तिथियों में बिना जल के रहना पड़ता है। उन्होंने बताया कि सबसे पहले निर्जला एकादशी के दिन स्नान-ध्यान कर जल से आचमन करना चाहिए। फिर भगवान विष्णु की, अपने इष्ट देव की पूजा करें। इसके बाद निर्जला एकादशी की कथा सुनें और सुनाएं। इस तरह से निर्जला एकादशी का व्रत शुरू होता है। इस एकादशी के दिन किसी भी प्रकार से जल ग्रहण करना वर्जित है। इसलिए इस एकादशी का व्रत रखने वालों को पूरे दिन और रात बिना जल ग्रहण किए रहना चाहिए।
निर्जला एकादशी पूजा का शुभ मुहूर्त, पारण का समय
एकादशी तिथि 30 मई दोपहर 01:09 बजे से शुरू हो रही है, लेकिन व्रत सूर्य उदय से शुरू होगा यानी 31 मई, 2023 को निर्जला एकादशी व्रत रखा जाएगा और द्वादशी तिथि को श्रद्धालु अपना व्रत तोड़ सकते हैं, जो 1 जून, 2023 को 01 बज कर 40 मिनट पर समाप्त होगा.
